अगर आपको खुशियों का चरम आनंद, अपने पिता के साथ लेते, एक २५ वर्षीय बच्चे को महसूस करना हो तो खुशदीप सहगल की लिखी यह लघु कथा अवश्य पढ़ें ! यह मेरे जीवन में पढी गयी सबसे सुन्दर और जीवंत घटना है ! लेखनी और विलक्षण प्रतिभा के धनी खुशदीप जी ने इसे जीवंत बना दिया ....
http://deshnama.blogspot.com/2010/04/blog-post_09.html
ब्लाग जगत में लिखे गए लेखों में से, अगर सबसे अधिक संग्रहणीय और उदाहरण देने योग्य वाकयात , देखने हैं तो देशनामा शायद अग्रणीय ब्लाग्स में से एक अवश्य होगा ! जितनी सरलता और हँसते हुए खुशदीप लिखते हैं शायद ही कोई उन जैसा होगा !
अतुलनीय प्रतिभा के धनी खुशदीप सहगल जी टीवी में वरिष्ठ प्रोडयूसर है !
Friday, August 6, 2010
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10 comments:
छोटी छोटी घटनाओं के माध्यम से गंभीर तथ्यों को समझा देते हैं वे !!
बहुत सही कहा आपने.
रामराम
खुशदीप जी के लेखन के तो हम भी कायल हैं जी
कहानी पढने जा रहा हूँ।
और सही कहा आपने खुशदीप जी का ब्लाग अग्रणी होगा नही, बल्कि है।
प्रणाम स्वीकार करें
सतीश जी - धन्यवाद आपने खुशदीप जी का लिंक दिया. बहुत ही सुंदर प्रस्तुति थी.
very very very sesible writer
............khusdip sehgal
आपसे हो कर देशनामा तक पहुंचा, धन्यवाद.
भैया धन्यवाद इतनी सुन्दर कहानी पढवाने के लिए, भैया आपकी अपनत्व से भरी टिप्पणियाँ पढ़कर अभिभूत हूँ, इसी तरह स्नेह बनाए रखियेगा!
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सहमत हूँ आपसे।
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सहगल भाई की प्रतिभा से परिचय कराने का शुक्रिया।
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मिलिए तंत्र मंत्र वाले गुरूजी से।
भेदभाव करते हैं वे ही जिनकी पूजा कम है।
इस लघुकथा का लिंक देने के लिये आपको बहुत-बहुत धन्यवाद.
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